भारत का वस्त्र उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह क्षेत्र न केवल करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करता है, बल्कि निर्यात, ग्रामीण विकास और पारंपरिक कला को संरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने वस्त्र क्षेत्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए कई महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम उठाए हैं।
भारत कपास का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है और साथ ही रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के उत्पादन में भी अग्रणी है। इसके अलावा, मानव निर्मित रेशों (Man-Made Fibres) और आधुनिक तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन्हीं मजबूत आधारों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वस्त्र उद्योग को रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने का प्रमुख साधन बनाया है।
वस्त्र उद्योग के विस्तार और रोजगार सृजन के लिए विशेष योजना
बजट में वस्त्र क्षेत्र के लिए एक समग्र और एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य कच्चे रेशे से लेकर तैयार परिधान तक की पूरी प्रक्रिया को सुदृढ़ करना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत नेशनल फाइबर स्कीम के माध्यम से प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों प्रकार के रेशों के उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू उद्योग को मजबूती मिलेगी।
इसके साथ ही वस्त्र उद्योग के विस्तार और रोजगार सृजन के लिए विशेष योजनाएँ लाई गई हैं, जिनके तहत आधुनिक मशीनरी, नई तकनीक और गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया जाएगा। हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों के लिए अलग से कार्यक्रम बनाए गए हैं, ताकि उनकी कला को बाजार से जोड़ा जा सके और उनकी आय में वृद्धि हो। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए टेक्स-इको पहल की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ वस्त्र उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, समर्थ 2.0 योजना के जरिए युवाओं को वस्त्र उद्योग से संबंधित आधुनिक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।
निर्यात को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने वस्त्र निर्यात से जुड़े नियमों को अधिक लचीला बनाया
बजट में महा टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। इन पार्कों में उद्योगों को अत्याधुनिक ढांचा, साझा सुविधाएँ और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे तकनीकी वस्त्रों जैसे चिकित्सा, औद्योगिक और रक्षा उपयोग के कपड़ों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिले और पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक पहचान मिल सके। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पलायन की समस्या भी कम होगी।
निर्यात को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने वस्त्र निर्यात से जुड़े नियमों को अधिक लचीला बनाया है। निर्यात प्रतिबद्धता की अवधि बढ़ाने से व्यापारियों को राहत मिलेगी और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में वस्त्र निर्यात को कई गुना बढ़ाना है।





















