नई दिल्ली: केंद्र सरकार के आम बजट 2026- 27 में फार्मा सेक्टर को लेकर एक नया और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस बार सरकार ने बायोफार्मा और बायोलॉजिक दवाओं को अपनी स्वास्थ्य और मैन्युफैक्चरिंग नीति का केंद्र बनाया है। इसका मकसद भारत को दुनिया के प्रमुख बायोफार्मा देशों में शामिल करना और वैश्विक बाजार में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है।
सरकार ने माना है कि देश में डायबिटीज, कैंसर और हृदय रोग जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं, पूरी दुनिया में अब ऐसी दवाओं की मांग बढ़ रही है जो ज्यादा असरदार और सुरक्षित हों। इसी वजह से बायोफार्मा को भविष्य का अहम सेक्टर माना जा रहा है।
बायोफार्मा क्या है?
बायोफार्मा ऐसी दवाओं से जुड़ा है, जो जीवित कोशिकाओं और जैविक प्रक्रियाओं से बनाई जाती हैं। सरल शब्दों में कहें तो, इन दवाओं को केमिकल के बजाय मानव कोशिकाओं, बैक्टीरिया या सूक्ष्म जीवों की मदद से तैयार किया जाता है।
इसमें शामिल हैं:
- वैक्सीन
- इंसुलिन
- कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों की दवाएं
- जीन और सेल थेरेपी
ये दवाएं शरीर पर ज्यादा सटीक असर करती हैं और कई गंभीर बीमारियों के इलाज में काफी उपयोगी साबित हो रही हैं।
बजट की बड़ी घोषणा: बायोफार्मा शक्ति योजना
बजट 2026- 27 में सरकार ने ‘बायोफार्मा शक्ति’ नाम की नई योजना शुरू करने का ऐलान किया है। इस योजना के लिए 5 साल में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इस योजना के मुख्य उद्देश्य:
- भारत में बायोलॉजिक और बायोसिमिलर दवाओं का उत्पादन बढ़ाना
- विदेशों से दवाओं के आयात पर निर्भरता कम करना
- भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में मजबूत बनाना
- शिक्षा, रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल को बढ़ावा
सरकार ने बायोफार्मा सेक्टर के लिए कुशल लोगों की कमी को देखते हुए 3 नए NIPER संस्थान खोलने 7 मौजूदा NIPER संस्थानों को आधुनिक बनाने का फैसला किया है। इसके अलावा, देशभर में 1,000 से ज्यादा क्लिनिकल ट्रायल सेंटर बनाए जाएंगे। इससे नई दवाओं की जांच तेज होगी और भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसेमंद रिसर्च सेंटर बन सकेगा।
दवा नियमन (Regulation) होगा और मजबूत
बायोलॉजिक दवाएं काफी जटिल होती हैं, इसलिए सरकार ने CDSCO को मजबूत करने का भी फैसला किया है। इसके तहत:
- विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की नियुक्ति
- दवाओं की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करना
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार नियम लागू करना
शामिल है।
जेनेरिक से इनोवेशन की ओर भारत
अब तक भारत को दुनिया में सस्ती जेनेरिक दवाओं के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बजट से साफ संकेत मिलता है कि सरकार भारत को नई और उन्नत दवाओं का केंद्र बनाना चाहती है। फिलहाल भारत दवा उत्पादन में मात्रा के हिसाब से दुनिया में तीसरे नंबर पर है। बायोफार्मा पर फोकस से भारत की पहचान और मजबूत हो सकती है।
सरकार की अन्य अहम योजनाएं
बायोफार्मा सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार पहले से ही कई योजनाएं चला रही है, जैसे:
- नेशनल बायोफार्मा मिशन
- BIRAC के तहत स्टार्टअप सपोर्ट
- PLI योजना और बल्क ड्रग पार्क
- PRIP योजना
- BioE3 नीति और Bio-RIDE योजना
इन योजनाओं से रिसर्च, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग को काफी मदद मिली है।





















