सिद्धिविनायक टाइम्स / शिमला : प्रदेश की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘वित्तीय अनुशासन’ के तहत एक बड़ा निर्णय लेते हुए अगले 6 महीनों के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और उच्च पदस्थ अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा अस्थायी रूप से रोकने (Defer) का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा अगले 6 महीनों के लिए रोका जाएगा, जबकि उप-मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्यों, सभी चेयरमैन, वाइस-चेयरमैन और राजनीतिक नियुक्तियों वाले सलाहकारों के वेतन में 20 प्रतिशत की कटौती की गई है। इसके अतिरिक्त, माननीय विधायकों के वेतन का भी 20 प्रतिशत हिस्सा अस्थायी रूप से ‘डेफर’ रहेगा।
प्रशासनिक स्तर पर मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और सभी प्रधान सचिवों के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा रोका जाएगा, जबकि सचिवों और विभागाध्यक्षों के वेतन में 20 प्रतिशत की कटौती लागू होगी। पुलिस विभाग में डीजीपी और एडीजीपी स्तर के अधिकारियों का 30 प्रतिशत और आईजी से लेकर एसपी स्तर तक के अधिकारियों का 20 प्रतिशत वेतन रोका जाएगा। इसी प्रकार वन विभाग के उच्चाधिकारियों जैसे पीसीसीएफ और एडिशनल पीसीसीएफ के लिए 30 प्रतिशत और डीएफओ स्तर तक के अधिकारियों के लिए 20 प्रतिशत कटौती का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने मध्यम और निचले स्तर के कर्मचारियों का विशेष ध्यान रखा है। ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के अधिकारियों के वेतन में केवल 3 प्रतिशत की मामूली कटौती होगी, जबकि ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के कर्मचारियों को इस निर्णय से पूरी तरह बाहर रखा गया है और उन्हें पूरा वेतन मिलता रहेगा। इसके साथ ही, राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त करने वाले सभी बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालय और स्वायत्त संस्थाओं को भी सरकार के इस निर्णय के अनुरूप कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए सरकार ने यह उम्मीद जताई है कि वर्तमान वित्तीय स्थिति को देखते हुए जिला न्यायाधीश स्तर पर भी स्वेच्छा से 20 प्रतिशत वेतन कटौती पर विचार किया जा सकता है।





















