संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय आलू अनुसन्धान संस्थान का जागरूकता अभियान शुरू
आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसन्धान संस्थान, शिमला ने कई प्रदेशों के किसानों के बीच उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य अत्यधिक उर्वरक उपयोग से उत्पन्न हो रही समस्याओं तथा इसके मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।
इस अभियान की रणनीति की समीक्षा डॉ ब्रजेश सिंह, निदेशक की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की गई। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत किसानों को अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती और ऐसे वैकल्पिक उपायों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जो रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम कर सकें। इस अभियान की शुरुआत भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
डॉ जगदेव शर्मा , प्रमुख (फसल उत्पादन), ने बताया कि किसानों को ऐसी फसल योजना (क्रॉप प्लानिंग) के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा, जिसमें अपेक्षाकृत कम उर्वरकों की आवश्यकता होती है। इस कार्यक्रम के तहत गांव स्तर पर बैठकें, खेत प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसानों में मृदा स्वास्थ्य सुधार को लेकर जागरूकता और क्षमता का विकास हो सके।
डॉ आलोक कुमार, प्रमुख (सामाजिक विज्ञान) ने जानकारी दी कि “मेरा गांव मेरा गौरव” कार्यक्रम के अंतर्गत कुल बारह टीमें 45 दिनों तक फील्ड में रहकर किसानों के साथ सीधे संवाद करेंगी और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देंगी। यह अभियान संस्थान के छह क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से उत्तर-प्रदेश, पंजाब, मध्य-प्रदेश, तमिलनाडु, मेघालय और बिहार में चलाया जाएगा।
डॉ पिनबिऑन्गलांग ने बताया कि प्रभावी नारों के माध्यम से जनजागरूकता और व्यवहार परिवर्तन संचार को मजबूत किया जाएगा तथा किसानों के साथ नियमित संवाद और जमीनी स्तर पर बेहतर प्रथाओं के प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस अवसर पर सीपीआरआई के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पहल न केवल मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाएगी, बल्कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने और लागत घटाने में भी सहायक होगी। इससे सतत कृषि को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय एवं समृद्धि में वृद्धि होगी।















