मंडी (सचिन शर्मा) :शुकदेव मुनि की तपोस्थली सुंदरनगर में आयोजित सात दिवसीय ऐतिहासिक राज्य स्तरीय नलवाड़ एवं किसान मेले का शुभारंभ रविवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ। मेले का विधिवत आगाज तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने नगौण खड्ड में बैल पूजन और खूंटी गाड़कर किया। इसके उपरांत जवाहर पार्क में ध्वजारोहण कर मेले की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर पूर्व सीपीएस सोहनलाल ठाकुर भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान एसडीएम एवं राज्य स्तरीय नलवाड़ मेला समिति के अध्यक्ष अमर नेगी ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। शोभा यात्रा में मुख्य अतिथि सहित अन्य गणमान्य लोग रंग-बिरंगी पगड़ियां पहनकर शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। यह सात दिवसीय नलवाड़ मेला सुंदरनगर की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है, जिसे दशकों से पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मेले में मंडी जिला ही नहीं, बल्कि प्रदेश और बाहरी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
इस मौके पर मंत्री राजेश धर्माणी ने सुंदरनगर व प्रदेशवासियों को 100 वर्ष से अधिक पुराने इस मेले की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह मेला प्रदेश की समृद्ध कृषि परंपरा और पशुपालन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने मेले की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय के साथ इसमें सकारात्मक बदलाव आए हैं और आज यह मेला स्थानीय कलाकारों, पारंपरिक खेलों तथा विशेष रूप से कुश्ती प्रतियोगिताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री राजेश धर्माणी ने प्रदेश सरकार के बजट की सराहना करते हुए इसे ‘10 में से 10’ अंक दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रस्तुत यह बजट युवाओं, किसानों और महिलाओं के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगा। उन्होंने बताया कि नादौन और देहरा में स्पोर्ट्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा आधुनिक बुनियादी ढांचे के लिए किया जा रहा निवेश आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा। सरकार का लक्ष्य केवल खर्च करना नहीं, बल्कि निवेश के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित करना है। इस दौरान उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्हें “राजनीतिक अपराधी” तक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नकारात्मक रवैये के चलते हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली आरडीजी ग्रांट (RDG Grant) बंद हो गई, जिससे प्रदेश के विकास को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय मिले लगभग 70 हजार करोड़ रुपये के अनटाइड फंड का यदि सही उपयोग किया जाता, तो आज प्रदेश पर कर्ज का बोझ इतना अधिक न होता। धर्माणी ने बीबीएमबी के एरियर और शानन पावर प्रोजेक्ट जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार के रुख को भी प्रदेश विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान भी भाजपा ने हिमाचल को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया, जो प्रदेश की जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार प्रत्येक संसाधन का सही उपयोग कर आत्मनिर्भर और समृद्ध हिमाचल के निर्माण के लिए कार्य कर रही है तथा विपक्ष को भी प्रदेशहित में सहयोग करना चाहिए।
मेले की सबसे प्रमुख विशेषता बैलों की खरीद-फरोख्त है, जिसमें दूर-दराज के किसान बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। हिमाचल प्रदेश में आज भी बड़ी संख्या में लोग कृषि, पशुपालन और बागवानी पर निर्भर हैं। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई क्षेत्रों में खेती के लिए बैलों का उपयोग आज भी प्रचलित है। हालांकि आधुनिक समय में खेती के तौर-तरीकों में बदलाव आया है और मैदानी क्षेत्रों में ट्रैक्टर व अन्य मशीनों का उपयोग बढ़ा है, फिर भी पारंपरिक कृषि प्रणाली में बैलों का महत्व बरकरार है। यह मेला न केवल कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देता है, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।





















