कुल्लू | रिपोर्टर: प्रिया शर्मा
कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मूसलाधार बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अखाड़ा बाजार के इनर क्षेत्र में एक बार फिर हुए भूस्खलन ने स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। पहाड़ी से अचानक गिरे मलबे और भारी चट्टानों के कारण घरों के पास बने सुरक्षा डंगे (Retaining Walls) ढह गए हैं, जिससे रिहायशी मकानों पर सीधा खतरा मंडराने लगा है।
खौफ में लोग: पुरानी आपदा के जख्म हुए ताजा
लगातार हो रही वर्षा अब स्थानीय लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। भूस्खलन के कारण क्षेत्र के कई सड़क मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे आवाजाही ठप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अभी पिछली आपदा के सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि कुदरत ने फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि सितंबर माह में इसी क्षेत्र में हुए भूस्खलन में मलबे में दबकर करीब 10 लोगों की जान चली गई थी और कई परिवार बेघर हो गए थे।
लगातार हो रही वर्षा अब स्थानीय लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। भूस्खलन के कारण क्षेत्र के कई सड़क मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे आवाजाही ठप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अभी पिछली आपदा के सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि कुदरत ने फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि सितंबर माह में इसी क्षेत्र में हुए भूस्खलन में मलबे में दबकर करीब 10 लोगों की जान चली गई थी और कई परिवार बेघर हो गए थे।
प्रभावितों का फूटा गुस्सा: “न मिला मुआवजा, न मिला किराया”
प्रशासन और सरकार के प्रति स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय युवक लकी ने बताया कि पिछली आपदा में उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दौरे के दौरान प्रभावितों को जल्द मुआवजा और किराए के मकान की सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में प्रभावितों को अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
प्रशासन और सरकार के प्रति स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय युवक लकी ने बताया कि पिछली आपदा में उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दौरे के दौरान प्रभावितों को जल्द मुआवजा और किराए के मकान की सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में प्रभावितों को अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
प्रशासनिक अनदेखी से बड़ा हादसा होने का डर
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि स्थिति की गंभीरता के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। क्षतिग्रस्त घरों और ढहते डंगों के बीच लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। प्रभावितों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करे और राहत राशि के साथ-साथ सुरक्षा के स्थाई प्रबंध सुनिश्चित करे, ताकि किसी बड़े जानी नुकसान को टाला जा सके।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि स्थिति की गंभीरता के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। क्षतिग्रस्त घरों और ढहते डंगों के बीच लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। प्रभावितों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करे और राहत राशि के साथ-साथ सुरक्षा के स्थाई प्रबंध सुनिश्चित करे, ताकि किसी बड़े जानी नुकसान को टाला जा सके।

















