धर्मशाला : हिमाचल प्रदेश में आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य सरकार हर जिले में स्टेट डिजास्टर रिलीफ स्टोर (एसडीआरएफ) स्थापित करेगी। इन स्टोरों में आपदा के समय प्रभावित लोगों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध रहेगी। साथ ही राज्य में 70 हजार लोगों को सिविल डिफेंस सेवाओं के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यह जानकारी स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) की महानिदेशक आईपीएस सतवंत अटवाल त्रिवेदी ने दी। वह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के क्षेत्रीय केंद्र खनियारा, धर्मशाला में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थीं। सम्मेलन का विषय कंटेम्परेरी इश्यू एंड चैलेंजेज इन डिजास्टर मैनेजमेंट था। कार्यक्रम में एचपीयू के कुलपति प्रो. महावीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
राहत सामग्री की उपलब्धता होगी सुनिश्चित
डीजी एसडीआरएफ सतवंत अटवाल त्रिवेदी ने बताया कि हर जिले में स्थापित होने वाले एसडीआरएस में आपदा की स्थिति में डिग्निटी किट उपलब्ध कराई जाएगी। इन किटों में भोजन, पानी, गर्म कपड़े, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल होगी, ताकि प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य में 32 प्रतिशत लोगों को डिजास्टर मैनेजमेंट हेल्पलाइन नंबर की जानकारी नहीं है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 37 प्रतिशत तक है। ऐसे में लोगों को जागरूक करना भी बेहद जरूरी है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही आपदाएं
उन्होंने कहा कि हिमाचल में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। शिमला और धर्मशाला जैसे क्षेत्रों में समय से पहले गर्मी पड़ रही है, जिसका असर खेती और बागवानी पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में पहले लगातार बारिश होती थी, लेकिन अब अत्यधिक भीड़ और पर्यावरणीय दबाव के कारण नई समस्याएं सामने आ रही हैं। इससे राज्य को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान और जनहानि भी झेलनी पड़ रही है।
बादल फटने की घटनाएं बढ़ीं
हिमालयी क्षेत्रों में कम हो रही बर्फबारी, पिघल रहे ग्लेशियर : प्रो. महावीर
एचपीयू के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि हिमाचल के हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी कम हो रही है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पांच नए सेंटर स्थापित किए गए हैं। इनमें डिजास्टर मैनेजमेंट, ग्रीन एनर्जी, साइबर, इंडियन नॉलेज सिस्टम और अन्य विषय शामिल हैं। इन केंद्रों से छात्र कभी भी जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग भी डेटा के आधार पर आपदा प्रबंधन में किया जाना चाहिए। साथ ही छात्रों को मोबाइल की लत से दूर रहकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। कुलपति ने क्षेत्रीय केंद्र खनियारा में बड़े हॉल और ऑडिटोरियम के निर्माण की योजना बनाने की भी बात कही।















