कश्मीर घाटी में रेल माल परिवहन को बड़ी सफलता
कश्मीर घाटी में रेल के जरिए माल ढुलाई को एक बड़ी सफलता मिली है। 22 जनवरी 2026 को चावल से भरी पहली पूरी मालगाड़ी अनंतनाग पहुंची। इससे यह साबित होता है कि अब घाटी में हर मौसम में रेल संपर्क पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है। इस सफलता के पीछे उधमपुर-श्रीनगर- बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना की बड़ी भूमिका है। इस परियोजना ने कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर रेल संपर्क दिया है।
पहली पूरी मालगाड़ी में कितना अनाज आया
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सहयोग से 42 वैगनों वाली मालगाड़ी के जरिए 2,768 मीट्रिक टन चावल अनंतनाग लाया गया। पहले केवल 21 वैगनों की मालगाड़ियां चलती थीं, जिनसे कम मात्रा में अनाज पहुंचता था। यह मालगाड़ी 21 जनवरी को पंजाब के संगरूर से चली और 24 घंटे के अंदर अनंतनाग पहुंच गई। खराब मौसम के बावजूद लोडिंग का काम पूरा किया गया, जिससे अनाज की आपूर्ति बनी रही।
लागत कम, आपूर्ति व्यवस्था मजबूत
विशेषज्ञों के अनुसार पूरी मालगाड़ियों से सामान ढोने पर खर्च कम होता है और जरूरी चीजें तेजी से पहुंचती हैं। इससे खराब मौसम के समय भी घाटी में अनाज का पर्याप्त भंडारण संभव होगा। रेल परिवहन से सड़कों पर भारी ट्रकों की संख्या कम होगी, जिससे पर्यावरण को लाभ मिलेगा। सेब, सीमेंट, उर्वरक और अब अनाज की ढुलाई से कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। आम लोगों को मिलेगा सीधा लाभ कड़ी ठंड और भारी बर्फबारी के बावजूद बेहतर रेल संपर्क किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के लिए जरूरी सामान की नियमित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है।





















