सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने नोगली स्थित सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन कॉलेज ऑफ एजुकेशन में नए स्नातक पाठ्यक्रमों का शुभारंभ करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की उपलब्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का मूल्यांकन केवल उसकी इमारतों या सुविधाओं से नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की प्रतिभा और उनके सर्वांगीण विकास से होना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने शिक्षक और उनके प्रशिक्षण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो विद्यार्थियों को बेहतर नागरिक बनाने के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाती है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़ी शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया और गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से ज्ञान के आदान-प्रदान की भारतीय परंपरा को याद किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को महान विचारकों और नेताओं से जोड़कर नैतिकता और मूल्यों के विकास में मदद करती है। साथ ही उन्होंने नशे की समस्या को जड़ से खत्म करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के आदर्शों का स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण के शिल्पकार भी होते हैं।
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राज्यपाल ने कॉलेज में बीए, बीएससी और बीकॉम पाठ्यक्रमों की शुरुआत को क्षेत्र के छात्रों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और वे घर के पास ही आत्मनिर्भर बन सकते हैं। कार्यक्रम में कॉलेज के अध्यक्ष डॉ. मुकेश शर्मा और प्रधानाचार्य डॉ. सीमा भारद्वाज ने राज्यपाल का स्वागत किया और संस्थान की गतिविधियों तथा नए पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें रामायण आधारित नृत्य नाटिका शामिल थी। इस अवसर पर राज्यपाल ने ‘असेसमेंट ऑफ लर्निंग’ पुस्तक का विमोचन भी किया और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों तथा मेधावी छात्रों को सम्मानित किया।





















