सिद्धिविनायक टाइम्स शिमला। मंडी में मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सरकार आवश्यक सेवाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है, जबकि स्वास्थ्य सुविधाएं सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी से जुड़ी होती हैं। एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल और लगभग 3000 डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश पर जाने जैसे संवेदनशील मामलों को सरकार समय रहते नहीं सुलझा पाई, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा। जयराम ठाकुर ने कहा कि एंबुलेंस और चिकित्सा सेवाएं आपातकालीन होती हैं और इनमें किसी भी तरह की चूक लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है, खासकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के मामलों में सरकार को अत्यधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। उन्होंने मंडी के नामधारी गुरुद्वारा में आयोजित कार्यक्रम में गुरु गोविंद सिंह जी के साहबज़ादों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस हमें अन्याय और अत्याचार के सामने न झुकने की प्रेरणा देता है। फतेह सिंह और जोरावर सिंह की शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, धर्म और दृढ़ संकल्प का अमर संदेश है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश को अपने गौरवशाली इतिहास और बलिदानों को जानने का अवसर मिलेगा।
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इसके अलावा, एम्पायर स्किल इंडिया इंस्टीट्यूट के वार्षिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की उपलब्धियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं का कुशल होना अनिवार्य है। अब तक इस योजना के तहत 2.27 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है और इस पर केंद्र सरकार द्वारा 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं, जिससे युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। डॉक्टर से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जल्दबाजी में निर्णय लिया, जिससे स्थिति और बिगड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार को शुरू से ही दोनों पक्षों से संवाद कर संतुलित समाधान निकालना चाहिए था। बाद में मुख्यमंत्री द्वारा फिर से जांच का आश्वासन देना इस बात का प्रमाण है कि निर्णय सोच-समझकर नहीं लिया गया। ऐसी घटनाएं प्रदेश की छवि और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, जिन्हें भविष्य में रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।





















