धर्मशाला: शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन भी विधानसभा का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। गेट नंबर–1 पर कांग्रेस और भाजपा विधायक फिर आमने-सामने दिखे। कांग्रेस ने केंद्र पर 1500 करोड़ रुपये की आपदा राहत राशि रोकने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा कर्मचारियों और पेंशनरों के भुगतानों में देरी को लेकर राज्य सरकार पर लगातार हमला करती रही। सुबह से ही परिसर के बाहर दोनों दलों का विरोध तेज़ रहा। कांग्रेस ने केंद्र से राहत राशि आने में देरी पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन खत्म होते ही भाजपा विधायकों ने तंज कसा, जिसके बाद दोनों दलों में आरोप- प्रत्यारोप और बढ़ गया।
भाजपा का आरोप- सरकार जवाब देने में नाकाम
1. नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार अपनी असफलताओं को छिपा रही है। उनका कहना था कि कांग्रेस अपनी गारंटियां केंद्र के पैसों से पूरी करना चाहती है और आपदा राहत राशि का गलत उपयोग करना चाहती है।
2. विधायक विपिन परमार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के रुके हुए भुगतानों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार केवल बातें कर रही है, लेकिन ग्रेच्यूटी, मेडिकल बिल और पेंशन का भुगतान नहीं हो रहा।
3. विधायक सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि आपदा राहत राशि का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है और कांग्रेस ने विरोध दिखाने के लिए ड्रामा किया है।
4. विधायक डॉ. जनक राज ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारी परेशानी में हैं, लेकिन सरकार बहाने बना रही है।
कांग्रेस का पलटवार- केंद्र पर राहत रोकने का आरोप
कांग्रेस विधायकों का कहना था कि केंद्र ने अब तक आपदा राहत की राशि जारी नहीं की, जबकि इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने खुद की थी।
1. विधायक केवल पठानिया ने कहा कि यह हिमाचल की पीड़ा का मुद्दा है, न कि किसी दल का।
2. मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि विपक्ष तथ्य सुनना नहीं चाहता और सिर्फ भ्रम फैलाता है।
3. विधायक मलेन्द्र राजन ने कहा कि भाजपा शोर तो करती है, लेकिन समाधान नहीं देती।
4. देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर ने कहा कि राहत राशि प्रदेश के हर परिवार का हक है और कांग्रेस इसे मिलने तक आवाज उठाती रहेगी।
तीसरे दिन भी जारी इस टकराव से संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में सत्र और अधिक गर्म हो सकता है।





















