कुल्लू, (प्रिया शर्मा): पिछले वर्षों में व्यास नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से सबक लेते हुए प्रशासन ने अब भविष्य की सुरक्षा के लिए कमर कस ली है। कुल्लू विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत भुंतर, पारला भुंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से ड्रेजिंग (नदी तल की खुदाई) और तटीयकरण का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।
वन विभाग के अधिकारी संदीप शर्मा ने इस महत्वपूर्ण परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि नदी की गहराई बढ़ाने और उसके किनारों को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से कार्य किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है।
परियोजना की मुख्य बातें:
इस परियोजना के तहत व्यास नदी के तल को 3 मीटर तक गहरा किया जाएगा। नदी में जमा सिल्ट और मलबे को निकालने से पानी की निकासी बेहतर होगी, जिससे बरसात के समय पानी रिहायशी इलाकों में नहीं घुसेगा। ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री और चिन्हित स्थलों की निकासी के लिए वन विकास निगम द्वारा नीलामी प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिससे सरकारी राजस्व का भी ध्यान रखा जाएगा।
इस परियोजना के तहत व्यास नदी के तल को 3 मीटर तक गहरा किया जाएगा। नदी में जमा सिल्ट और मलबे को निकालने से पानी की निकासी बेहतर होगी, जिससे बरसात के समय पानी रिहायशी इलाकों में नहीं घुसेगा। ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री और चिन्हित स्थलों की निकासी के लिए वन विकास निगम द्वारा नीलामी प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिससे सरकारी राजस्व का भी ध्यान रखा जाएगा।
बरसात से पहले सुरक्षा का लक्ष्य:
प्रशासन ने इस कार्य को पूरा करने के लिए मई-जून के अंत तक की समय सीमा (डेडलाइन) तय की है। लक्ष्य यह है कि मानसून की पहली बारिश आने से पहले ड्रेजिंग का काम पूरा कर लिया जाए ताकि भुंतर और पारला भुंतर जैसे निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को बाढ़ के डर से मुक्ति मिल सके।
प्रशासन ने इस कार्य को पूरा करने के लिए मई-जून के अंत तक की समय सीमा (डेडलाइन) तय की है। लक्ष्य यह है कि मानसून की पहली बारिश आने से पहले ड्रेजिंग का काम पूरा कर लिया जाए ताकि भुंतर और पारला भुंतर जैसे निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को बाढ़ के डर से मुक्ति मिल सके।















