शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। सदन में बजट पारित होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता में कमी और राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी।
पहली बार जनता के सामने रखी वास्तविक स्थिति
मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी सरकार ने राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति को पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आंकड़ों के मायाजाल के बजाय धरातल की सच्चाई पर काम कर रही है।
RDG बंद होने से बजट के आकार पर पड़ा असर
मुख्यमंत्री ने बजट के आकार में आई कमी का मुख्य कारण राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant – RDG) को बताया। उन्होंने कहा, “हिमाचल को RDG के रूप में उसका वाजिब हक नहीं मिला, जिसके चलते हमें बजट के आकार को सीमित करना पड़ा।” मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि केंद्रीय मदद में आई इस कमी ने राज्य की वित्तीय योजनाओं को प्रभावित किया है।
राजस्व बढ़ाने के लिए नए रास्तों की तलाश
बजट पारित होने के बाद अब सुक्खू सरकार का पूरा ध्यान राज्य के भीतर ही आय के नए स्रोत (Revenue generation) पैदा करने पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इस बात पर गंभीरता से मंथन किया जाएगा कि राज्य में राजस्व के दरवाजे कैसे खोले जाएं। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने की दिशा में सरकार कड़े और महत्वपूर्ण फैसले ले सकती है।
बजट की मुख्य बातें:
- कुल बजट: ₹54,928 करोड़।
- पारित होने की प्रक्रिया: सदन में ध्वनि मत (Voice Vote) द्वारा।
- प्राथमिकता: वित्तीय अनुशासन और आत्म-निर्भरता।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि चुनौतियों के बावजूद सरकार विकास की गति को रुकने नहीं देगी और जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए वित्तीय प्रबंधन को मजबूत किया जाएगा।

















