मंडी (सचिन शर्मा): राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेला में इस बार भक्ति और परंपराओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला। मेले के दौरान आयोजित ‘भक्ति रात्रि’ ने जहाँ एक ओर समूचे क्षेत्र को श्रद्धा के वातावरण में सराबोर कर दिया, वहीं दूसरी ओर हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति को एक नया और जीवंत मंच प्रदान किया। इस पावन अवसर पर उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगनने सपरिवार देव श्री बड़ेयोगी महाराज के दर पर शीश नवाया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
देव संस्कृति को सहेजने की अनूठी पहल
कार्यक्रम के दौरान डीसी अपूर्व देवगन ने कहा कि देव श्री बड़ेयोगी महाराज की आरती में परिवार, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनता के साथ शामिल होना उनके लिए एक अत्यंत सौभाग्यपूर्ण और भावुक अनुभव रहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिला प्रशासन मंडी की प्राचीन देव परंपराओं को न केवल सहेजने, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “भक्ति रात्रि जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने की दिशा में एक सशक्त कदम हैं। भविष्य में इन आयोजनों को और अधिक व्यापक और भव्य रूप दिया जाएगा।”
सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र बना मेला
अपूर्व देवगन ने मंडी और सुंदरनगर की देव संस्कृति के गहरे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव की तर्ज पर अब सुंदरनगर के मंच पर भी प्रदेश की विविधता देखने को मिल रही है। उन्होंने विशेष रूप से किन्नौर के पारंपरिक ‘रौलाने’ उत्सव की प्रस्तुति का जिक्र किया, जो दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी रही।
भावी पीढ़ी के लिए विरासत का संरक्षण
उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों की लुप्त होती प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को एक साझा मंच पर लाना है। इससे न केवल आमजन अपनी जड़ों से जुड़ सकेंगे, बल्कि ये परंपराएं समय के साथ और अधिक सशक्त व जीवंत बनी रहेंगी।





















