पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने देश में बढ़ती आत्महत्याओं और बेरोजगारी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जनसंख्या विस्फोट को इन सभी समस्याओं की जड़ बताया है। उन्होंने पालमपुर में कहा कि पिछले वर्ष देश में 1.87 लाख लोगों और 13 हजार छात्रों द्वारा आत्महत्या करना एक हृदयविदारक स्थिति है, जो युवाओं में बढ़ती निराशा को दर्शाती है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबी और बेरोजगारी दूर करने के लिए कई बेहतरीन योजनाएं तो बनीं, लेकिन बेतहाशा बढ़ती आबादी के कारण उनके परिणाम सीमित रह जाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 1947 में जो आबादी 39 करोड़ थी, वह आज 144 करोड़ पहुंच चुकी है, और जब तक इस ‘टिड्डी दल’ की तरह बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं पाया जाता, तब तक बेरोजगारी और हताशा का अंधेरा दूर करना असंभव है।



















