कुल्लू के अखाड़ा बाजार स्थित वार्ड नंबर-2 में भूस्खलन के सात महीने बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। पिछले साल 2 सितंबर को हुए भीषण भूस्खलन, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी, के बाद से अब तक न तो प्रशासन ने मलबे का एक पत्थर हटाया है और न ही प्रभावितों की सुध ली है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन (1100) पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समाधान करने के बजाय उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे पिछले 8 महीनों से अपनों के साथ विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं। घरों के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बावजूद प्रशासन द्वारा न तो किराए की व्यवस्था की गई और न ही अब तक कोई मुआवजा मिला है। क्षेत्र में ड्रेनेज यानी पानी की निकासी की व्यवस्था न होने के कारण वर्तमान सर्दियों की बारिश भी ढलानों को और कमजोर कर रही है, जिससे बचे हुए घरों पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। लोगों में इस बात को लेकर भारी डर है कि यदि बरसात शुरू होने से पहले सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए, तो यहाँ दोबारा बड़ी जनहानि हो सकती है।
प्रभावितों ने प्रशासन पर “तमाशा देखने” का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका सामान और जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। अब स्थानीय निवासियों की सरकार से केवल एक ही पुरजोर मांग है कि जल्द से जल्द यहाँ से मलबा हटाकर ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वे अपने घरों में लौटकर एक बार फिर सामान्य जीवन शुरू कर सकें।





















