सुक्खू सरकार पर चौतरफा हमला: “चौबे बनने गए थे छब्बे, दुबे बनके लौटे” वाली स्थिति—भाजपा
शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार इन दिनों विपक्ष के तीखे हमलों और वित्तीय संकट के भंवर में फंसी नजर आ रही है। विधानसभा में टैक्स, वैट बढ़ोतरी और नए सेस (Cess) के प्रस्तावों को लेकर भाजपा ने सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री की स्थिति उस कहावत जैसी हो गई है कि— “चौबे बनने गए थे छब्बे, दुबे बनके लौटे।”
जनता पर टैक्स की मार, मित्रों की मौज
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि सुक्खू सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं का बोझ आम जनता की जेब पर डाल रही है। पेट्रोल-डीजल पर ‘विधवा एवं अनाथ उपकर’ (Cess) और बिजली की दरों में बदलाव को लेकर विपक्ष का कहना है कि इससे महंगाई चरम पर पहुंचेगी। भाजपा का सीधा आरोप है कि मुख्यमंत्री जनता को महंगाई की आग में झोंककर अपने ‘खास मित्रों’ को उपकृत करने में मस्त हैं।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि सुक्खू सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं का बोझ आम जनता की जेब पर डाल रही है। पेट्रोल-डीजल पर ‘विधवा एवं अनाथ उपकर’ (Cess) और बिजली की दरों में बदलाव को लेकर विपक्ष का कहना है कि इससे महंगाई चरम पर पहुंचेगी। भाजपा का सीधा आरोप है कि मुख्यमंत्री जनता को महंगाई की आग में झोंककर अपने ‘खास मित्रों’ को उपकृत करने में मस्त हैं।
गारंटियां फेल, आपस में ही ‘बज रहे बर्तन’
कांग्रेस द्वारा चुनाव से पहले दी गई 10 गारंटियों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। विपक्ष के अनुसार, प्रदेश कर्ज के दलदल में धंसता जा रहा है और सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के लाले पड़ रहे हैं। ऐसे में गारंटियां पूरी करना तो दूर की बात है। भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर मचे घमासान के कारण ‘बर्तन आपस में ही बज रहे हैं’, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कांग्रेस द्वारा चुनाव से पहले दी गई 10 गारंटियों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। विपक्ष के अनुसार, प्रदेश कर्ज के दलदल में धंसता जा रहा है और सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के लाले पड़ रहे हैं। ऐसे में गारंटियां पूरी करना तो दूर की बात है। भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर मचे घमासान के कारण ‘बर्तन आपस में ही बज रहे हैं’, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कर्ज के बोझ तले दबता हिमाचल
आंकड़ों का हवाला देते हुए विपक्ष ने कहा कि प्रदेश पर कर्ज का बोझ अब ₹1 लाख करोड़ के पार जाने की कगार पर है। “कंबल ओढ़कर घी पीने” वाली कार्यशैली पर प्रहार करते हुए भाजपा ने कहा कि मुख्यमंत्री जमीनी हकीकत से दूर हैं। जब जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, तब सरकार केवल टैक्स बढ़ाने और गोल-मोल बातें करने में समय व्यतीत कर रही है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए विपक्ष ने कहा कि प्रदेश पर कर्ज का बोझ अब ₹1 लाख करोड़ के पार जाने की कगार पर है। “कंबल ओढ़कर घी पीने” वाली कार्यशैली पर प्रहार करते हुए भाजपा ने कहा कि मुख्यमंत्री जमीनी हकीकत से दूर हैं। जब जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, तब सरकार केवल टैक्स बढ़ाने और गोल-मोल बातें करने में समय व्यतीत कर रही है।

















