धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित कोतवाली बाजार के सामुदायिक भवन में ‘देव भूमि मैत्री संघ’ द्वारा एक भव्य धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। यह आयोजन तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के 90वें जन्मवर्ष और संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
सम्मेलन को संबोधित करने से पहले, दत्तात्रेय होसबाले ने परम पावन दलाई लामा से शिष्टाचार भेंट की और निर्वासित तिब्बत सरकार की संसद का भी गहन अवलोकन किया।
विश्व शांति के लिए आत्मिक शांति अनिवार्य: होसबाले
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में विश्व शांति के लिए मनुष्य की आत्मिक शांति सबसे जरूरी है। उन्होंने भगवान बुद्ध के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन की जड़ें प्रकृति में समाहित हैं। उन्होंने गुरु तेगबहादुर और दलाई लामा का उदाहरण देते हुए धर्म की रक्षा के लिए दिए गए बलिदानों को याद किया और सभी से धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में विश्व शांति के लिए मनुष्य की आत्मिक शांति सबसे जरूरी है। उन्होंने भगवान बुद्ध के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन की जड़ें प्रकृति में समाहित हैं। उन्होंने गुरु तेगबहादुर और दलाई लामा का उदाहरण देते हुए धर्म की रक्षा के लिए दिए गए बलिदानों को याद किया और सभी से धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का आह्वान किया।
एकता और समरसता पर जोर: लिंग रिंपोछे
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि 7वें लिंग रिंपोछे ने आरएसएस के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए एकता, समरसता और सद्भावना को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, अहिंसा और विश्व शांति के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। रिंपोछे ने कहा कि आज के समय में भारत पूरी दुनिया को सही दिशा दिखाने का सामर्थ्य रखता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि 7वें लिंग रिंपोछे ने आरएसएस के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए एकता, समरसता और सद्भावना को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, अहिंसा और विश्व शांति के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। रिंपोछे ने कहा कि आज के समय में भारत पूरी दुनिया को सही दिशा दिखाने का सामर्थ्य रखता है।
सैकड़ों बौद्ध अनुयायी रहे मौजूद
इस विशेष सम्मेलन में किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कांगड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों बौद्ध अनुयायियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दलाई लामा के 90 वर्ष पूर्ण होने और संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज में एकता और शांति का संदेश फैलाना था।
इस विशेष सम्मेलन में किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कांगड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों बौद्ध अनुयायियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दलाई लामा के 90 वर्ष पूर्ण होने और संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज में एकता और शांति का संदेश फैलाना था।
















