धर्मशाला के मैकलोडगंज स्थित त्सुगलाखंग मुख्य मंदिर में 67वें तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बत और तिब्बती लोगों के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की। इस प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी, चेक गणराज्य और लातविया के वरिष्ठ सांसद शामिल रहे। धर्मशाला के त्सुगलाखंग मुख्य मंदिर में 67वें तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के बाद एक उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बत के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी की संसद के सदस्य और संसदीय राज्य सचिव माइकल ब्रांड, यूरोपीय संसद के पूर्व अध्यक्ष हंस-गर्ट पोटरिंग, चेक गणराज्य की सीनेट के उपाध्यक्ष जिरी ओबरफाल्ज़र और लातविया के सांसद ज्यूरिस विलम्स शामिल थे।
जर्मन बुंडेसटाग के सदस्य माइकल ब्रांड ने कहा कि तिब्बती संस्कृति और भाषा पर चीनी शासन से खतरे बढ़ रहे हैं और इस विषय पर वैश्विक जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने औपनिवेशिक बोर्डिंग स्कूलों जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि तिब्बत की वास्तविक स्थिति को दुनिया के सामने लाना जरूरी है। चेक गणराज्य की सीनेट के उपाध्यक्ष जिरी ओबरफाल्ज़र ने कहा कि तिब्बत में चीन के कृत्य कई गंभीर अपराधों की श्रेणी में आते हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसके खिलाफ अपनी आवाज उठानी चाहिए। यूरोपीय संसद के पूर्व अध्यक्ष हंस-गर्ट पोटरिंग ने कहा कि हर व्यक्ति की गरिमा और आत्म-निर्णय का अधिकार होना चाहिए और यह सिद्धांत तिब्बती लोगों पर भी समान रूप से लागू होता है। उन्होंने कहा कि तिब्बती पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
वहीं लातविया के सांसद ज्यूरिस विलम्स ने कहा कि उनका देश 50 वर्षों तक कम्युनिस्ट शासन के अधीन रहा और आज आजाद होकर खुद को सौभाग्यशाली महसूस करता है। उन्होंने कहा कि तिब्बत का संघर्ष दुनिया के कई हिस्सों में हो रहे संघर्षों से जुड़ा हुआ है। प्रतिनिधिमंडल ने आश्वासन दिया कि वे अपनी-अपनी संसदों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिब्बत से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे। 67वें तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस समारोह में इस अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने तिब्बती लोगों के शांतिपूर्ण संघर्ष के प्रति वैश्विक समर्थन को और मजबूती दी है।















