हिमाचल प्रदेश के वित्त वर्ष 2025-26 के बजट पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे प्रदेश के इतिहास का सबसे दिशाहीन और निराशाजनक बजट करार दिया है। महाजन ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किया गया यह बजट विकास का नहीं, बल्कि प्रदेश को विनाश की ओर ले जाने वाला दस्तावेज़ है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि ₹54,928 करोड़ का यह बजट पिछले वर्ष के ₹58,514 करोड़ के मुकाबले कम है, जो इस बात का सीधा प्रमाण है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था बढ़ने के बजाय लगातार सिकुड़ती जा रही है। उन्होंने सरकार की वित्तीय नीतियों को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि हिमाचल आज गहरे आर्थिक संकट और भारी कर्ज के बोझ तले दब चुका है, जिससे बाहर निकलने का कोई रोडमैप सरकार के पास नहीं है।
सांसद हर्ष महाजन ने प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उसे अपने ही कर्मचारियों का वेतन तक स्थगित करने पर मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार के पास अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन और भत्ते देने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी नीतिगत विफलताओं और प्रशासनिक अक्षमता को छिपाने के लिए वह छोटे-छोटे मानदेय बढ़ाकर प्रदेश की जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। महाजन के अनुसार, यह बजट न तो युवाओं को रोजगार देने की क्षमता रखता है और न ही राज्य के बुनियादी ढांचे में सुधार लाने की, बल्कि यह केवल आंकड़ों की बाजीगरी के माध्यम से लोगों की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते अपने फिजूलखर्चों पर नियंत्रण नहीं पाया और बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने के लिए ठोस उपाय नहीं किए, तो हिमाचल आने वाले समय में एक बड़े वित्तीय दिवालिएपन की स्थिति में पहुंच जाएगा।





















