धर्मशाला (शशि भूषण): हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज ठाकुर ने धर्मशाला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 को गद्दी समुदाय और भेड़पालकों के लिए बेहद ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि 21 मार्च को घोषित इस बजट में भेड़ पालन व्यवसाय को सुदृढ़ करने के लिए लिए गए निर्णय इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे।
मनोज ठाकुर ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए बताया कि पिछले लगभग 25 से 30 वर्षों के लंबे अंतराल में ऊन की कीमतों में मात्र 7 रुपये की मामूली बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने भेड़पालकों की आर्थिकी को सीधा लाभ पहुँचाने के लिए इसे बढ़ाकर अब 100 रुपये कर दिया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार मूल्य के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए सरकार ने 2 करोड़ रुपये के विशेष फंड का प्रावधान भी किया है, ताकि पशुपालकों को अपनी ऊन बेचने में किसी भी प्रकार की आर्थिक बाधा का सामना न करना पड़े।
बढ़ती बेरोजगारी की चुनौती को देखते हुए सरकार अब भेड़ पालन को एक सशक्त स्वरोजगार के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। इस दिशा में जल्द ही 300 करोड़ रुपये की लागत वाला एक विशाल प्रोजेक्ट धरातल पर उतारा जाएगा, जिससे प्रदेश के युवाओं को इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ने के नए अवसर मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, भेड़पालकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए 10 लाख रुपये का जीवन बीमा और उनके उत्पादों जैसे मीट व दूध को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर दाम दिलाने के लिए ‘ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन’ की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों जैसे लाहौल-स्पीति, किन्नौर और भरमौर में पाई जाने वाली विशिष्ट ‘चेंगु’ नस्ल की भेड़-बकरियों के संरक्षण और उनके विकास के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। मनोज ठाकुर ने विश्वास जताया कि इन कल्याणकारी कदमों से प्रदेश का गद्दी समुदाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा और पशुपालन के क्षेत्र में हिमाचल एक नई पहचान स्थापित करेगा।

















