सिधिविनायक टाइम्स: शिमला। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ठाकुर का कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों को ढकने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ—आरएसएस—के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चला रही है। अनुराग ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हिमाचल की मौजूदा कांग्रेस सरकार विकास कार्यों, जनता से किए गए वादों और कानून व्यवस्था सहित लगभग हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। उनका आरोप है कि सरकार की नाकामियों की सूची बहुत लंबी है, लेकिन इसके बावजूद सत्ता पक्ष अहंकार में डूबा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए आरएसएस पर बेबुनियाद और ओछे आरोप लगा रही है।
ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की एक ऐसी संस्था है जो लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। उन्होंने दावा किया कि आपदाओं और राष्ट्रीय संकटों के समय संघ के स्वयंसेवक हमेशा राहत और बचाव कार्यों में आगे रहे हैं। उनका कहना है कि इन सेवाभावी कार्यों को नज़रअंदाज़ करते हुए कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ के लिए संघ को बदनाम करना चाहती है। अपने बयान में अनुराग ठाकुर ने यह भी कहा कि आरएसएस ने एक सदी के दौरान देश की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के सामाजिक कार्यों में लगे रहते हैं, और अपने सिद्धांतों व सेवाभाव से कभी पीछे नहीं हटते। ठाकुर के अनुसार, इसके बावजूद कांग्रेस ग़लत तथ्यों के आधार पर संगठन की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।
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ठाकुर ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि राजनीतिक पूर्वाग्रह के चलते सरकार ऐसी स्थिति उत्पन्न कर रही है जिससे आरएसएस और उसके कार्यकर्ताओं पर अनावश्यक दबाव बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा एक समावेशी और राष्ट्रवादी सोच के साथ समाज को जोड़ने का काम किया है, लेकिन कांग्रेस अपने आरोपों के ज़रिये इसका मनोबल गिराने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से मांग की कि वह आरएसएस पर की गई ओछी टिप्पणी के लिए बिना किसी लाग-लपेट के सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन तमाम राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश का राजनीतिक माहौल और गर्म हो सकता है।





















