सिद्धिविनायक टाइम्स शिमल । मंडी में मीडिया से बातचीत के दौरान हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Mukesh Agnihotri ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को लेकर केंद्र सरकार के निर्णय पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की आर्थिक व्यवस्था की आधारशिला रही है और इसे बंद करना प्रदेश की वित्तीय स्थिरता पर सीधा प्रहार है। उपमुख्यमंत्री के अनुसार राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां और सीमित संसाधन इसे पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनने से रोकते हैं, ऐसे में केंद्र से मिलने वाली यह सहायता विकास कार्यों, कर्मचारियों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और आधारभूत ढांचे के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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उन्होंने दावा किया कि आरडीजी में कटौती से राज्य को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, और यदि जीएसटी क्षतिपूर्ति को भी जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा और अधिक बढ़ जाता है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि प्रदेश के अधिकार और भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि हिमाचल की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरडीजी को तुरंत बहाल किया जाए। साथ ही, उन्होंने विपक्षी दल पर आरोप लगाया कि राज्य के हितों की मजबूती से पैरवी नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि संघीय ढांचे की भावना तभी सार्थक होगी जब केंद्र और राज्य परस्पर सहयोग की भावना से कार्य करें।





















