धर्मशाला | शशि भूषण
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUHP) हिमालयी क्षेत्र में पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान और आपदा प्रबंधन को नई दिशा देने की तैयारी में है। विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग और रिमोट सेंसिंग (RS) एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) केंद्र की स्थापना के साथ ही, आगामी 4 से 6 अप्रैल तक एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUHP) हिमालयी क्षेत्र में पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान और आपदा प्रबंधन को नई दिशा देने की तैयारी में है। विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग और रिमोट सेंसिंग (RS) एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) केंद्र की स्थापना के साथ ही, आगामी 4 से 6 अप्रैल तक एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
हिमालयन होराइजन्स: एक वैश्विक मंच
‘हिमालयन होराइजन्स: टेक्टोनिक्स, सस्टेनेबिलिटी, और रेजिलिएंस – 1905 के कांगड़ा भूकंप से आज तक (HTSR 2026)’ विषय पर आधारित इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देश-विदेश के 150 से अधिक दिग्गज भू-विज्ञानी भाग लेंगे। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भू-खतरों, पर्यावरणीय स्थिरता और स्थानिक प्रौद्योगिकियों (Spatial Technologies) के क्षेत्र में अंतर्विषयक शोध को बढ़ावा देना है
‘हिमालयन होराइजन्स: टेक्टोनिक्स, सस्टेनेबिलिटी, और रेजिलिएंस – 1905 के कांगड़ा भूकंप से आज तक (HTSR 2026)’ विषय पर आधारित इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देश-विदेश के 150 से अधिक दिग्गज भू-विज्ञानी भाग लेंगे। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भू-खतरों, पर्यावरणीय स्थिरता और स्थानिक प्रौद्योगिकियों (Spatial Technologies) के क्षेत्र में अंतर्विषयक शोध को बढ़ावा देना है
ऐतिहासिक आपदा से भविष्य की सीख
केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने बताया कि यह कार्यशाला 1905 के ऐतिहासिक कांगड़ा भूकंप की स्मृति में आयोजित की जा रही है, जो उत्तर-पश्चिमी हिमालय में आई अब तक की सबसे विनाशकारी भूकंपीय घटनाओं में से एक थी। प्रो. बंसल ने कहा, “यह कार्यशाला न केवल अतीत की आपदा को याद करने का जरिया है, बल्कि वर्तमान में क्षेत्र में बढ़ते आपदा जोखिमों और समकालीन चुनौतियों के समाधान खोजने का एक सशक्त मंच भी है।”
केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने बताया कि यह कार्यशाला 1905 के ऐतिहासिक कांगड़ा भूकंप की स्मृति में आयोजित की जा रही है, जो उत्तर-पश्चिमी हिमालय में आई अब तक की सबसे विनाशकारी भूकंपीय घटनाओं में से एक थी। प्रो. बंसल ने कहा, “यह कार्यशाला न केवल अतीत की आपदा को याद करने का जरिया है, बल्कि वर्तमान में क्षेत्र में बढ़ते आपदा जोखिमों और समकालीन चुनौतियों के समाधान खोजने का एक सशक्त मंच भी है।”
प्रमुख विशेषज्ञ करेंगे शिरकत
कार्यशाला में विश्व प्रसिद्ध भू-भौतिकीविद् और पद्मश्री से सम्मानित हर्ष के. गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे, जो प्रेरित भूकंपीयता (Induced Seismicity) पर अपने शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हैं। उनके साथ ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के निदेशक और प्रख्यात भू-विज्ञानी डॉ. शैलेश नायक भी अपने विचार साझा करेंगे।
कार्यशाला में विश्व प्रसिद्ध भू-भौतिकीविद् और पद्मश्री से सम्मानित हर्ष के. गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे, जो प्रेरित भूकंपीयता (Induced Seismicity) पर अपने शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हैं। उनके साथ ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के निदेशक और प्रख्यात भू-विज्ञानी डॉ. शैलेश नायक भी अपने विचार साझा करेंगे।
बढ़ते आपदा जोखिमों पर चिंता
कुलपति ने हाल के वर्षों में हिमाचल प्रदेश में चरम मौसमी घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं में हुई वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से 2023 और 2025 के मानसून सीजन के दौरान हुए विनाशकारी भूस्खलन का जिक्र किया, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंथन से भविष्य में आपदा सहनशीलता और बेहतर प्रबंधन की रणनीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी।
कुलपति ने हाल के वर्षों में हिमाचल प्रदेश में चरम मौसमी घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं में हुई वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से 2023 और 2025 के मानसून सीजन के दौरान हुए विनाशकारी भूस्खलन का जिक्र किया, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंथन से भविष्य में आपदा सहनशीलता और बेहतर प्रबंधन की रणनीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी।

















