*धर्मशाला: 12 अप्रैल, 2026* हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी एवं मुख्यमंत्री कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री के मीडिया को-ऑर्डिनेटर रहे एडवोकेट विश्व चक्षु ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार हिमाचल प्रदेश में तथाकथित “झूठी सरकार का मॉडल” लागू कर रही है, जहाँ आर्थिक संकट के चलते कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन को ‘डेफर’ करने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
विश्व चक्षु ने इस घटनाक्रम को प्रदेश के इतिहास में अभूतपूर्व और शर्मनाक बताते हुए कहा कि आर्थिक मोर्चे पर वर्तमान सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से डगमगा गई है, और अब हालात ऐसे बन गए हैं कि न केवल कर्मचारियों बल्कि जनप्रतिनिधियों के वेतन पर भी संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने वर्तमान शासनकाल में भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार के गंभीर आरोप हिमाचल के इतिहास में पहले कभी नहीं लगे। भाजपा का एकमात्र लक्ष्य इस “भ्रष्ट और जनविरोधी सरकार” को उखाड़ फेंकना है। चेस्टर हिल प्रकरण पर बोलते हुए विश्व चक्षु ने कहा कि इस मामले में धारा 118 के उल्लंघन के साथ-साथ बेनामी लेनदेन की स्पष्ट संभावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने राजस्व सचिव के पद पर रहते हुए अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया, जिसकी जानकारी मुख्यमंत्री को पहले से थी, किंतु अब उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है।प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार में तालमेल का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। एक ओर मुख्य सचिव द्वारा सेवा विस्तार न देने के आदेश जारी किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर उसी दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से सेवा विस्तार दे दिया जाता है, जो प्रशासनिक अराजकता को दर्शाता है।मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने उन्हें “झूठ का मसीहा” करार दिया और कहा कि असम चुनाव के दौरान किए गए उनके दावे असत्य थे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री को केवल झूठ बोलने का दायित्व सौंप रखा है। ऋण के आंकड़ों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के पाँच वर्षों में लगभग 19 हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने मात्र सवा वर्ष में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लिया है, जिससे कुल ऋण 1.10 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री केंद्र सरकार से प्राप्त सहायता को सार्वजनिक रूप से स्वीकारने से बचते हैं, जबकि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद ही प्रदेश को विकास कार्यों हेतु 4000 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई थी।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के परस्पर विरोधाभासी बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जब सरकार के भीतर ही 2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य को लेकर सहमति नहीं है, तो जनता का विश्वास इस सरकार से पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
















