हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व भाजपा सरकार पर 1100 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाए जाने पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई और सरकार पर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि न तो प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री की बातों पर भरोसा करती है और न ही कांग्रेस के नेता खुद उन पर विश्वास करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पूर्व भाजपा सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि अधिकारियों को भाजपा नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज करने के निर्देश दिए जा रहे हैं और पूर्व सरकार की योजनाओं की जांच कराई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में इतना बड़ा घोटाला हुआ है, तो उसकी जांच क्यों नहीं करवाई जा रही। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बजट पर संतुलित जवाब देने के बजाय बार-बार घोटालों के अलग-अलग आंकड़े पेश कर रहे हैं—कभी 100 करोड़ तो कभी 1100 करोड़ रुपये। उन्होंने इसे गैर जिम्मेदाराना बताया और कहा कि मुख्यमंत्री को सदन के भीतर जवाबदेही निभानी चाहिए।
मंडी में एमआरआई टेंडर मामले का जिक्र करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि 2022 में टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद इसे पूरा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के बाहर निजी एमआरआई लगाने के मामले में मुख्यमंत्री ने पहले आरोप लगाए और बाद में अपने बयान वापस ले लिए, जो उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस सरकार पर संस्थान बंद करने और पूर्व भाजपा सरकार की योजनाओं के नाम बदलने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार भाजपा की योजनाओं को निशाना बना रहे हैं।
भाजपा में गुटबाजी के सवाल पर जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के मंत्री ही मुख्यमंत्री को लेकर बयान दे रहे हैं, ऐसे में सरकार को पहले अपने घर को संभालना चाहिए।
Byte—- जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
















