चंबा (अमृत पाल सिंह): हिमाचल प्रदेश के मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले खज्जियार में विकसित ‘मिस्टिक विलेज’ आज गद्दी संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है। आधुनिकता के इस दौर में, जहाँ पारंपरिक मूल्य धुंधले पड़ते जा रहे हैं, वहीं यह विलेज प्राचीन रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सराहनीय कार्य कर रहा है।
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
मिस्टिक विलेज में आने वाले सैलानियों को गद्दी समुदाय के पारंपरिक जीवन के करीब जाने का मौका मिलता है। यहाँ गद्दी संस्कृति का खान-पान, पारंपरिक पहनावा और उनके ग्रामीण परिवेश को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, लोक नृत्यों और भजन-कीर्तन के आयोजनों के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध लोक कला को जीवित रखा जा रहा है।
मिस्टिक विलेज में आने वाले सैलानियों को गद्दी समुदाय के पारंपरिक जीवन के करीब जाने का मौका मिलता है। यहाँ गद्दी संस्कृति का खान-पान, पारंपरिक पहनावा और उनके ग्रामीण परिवेश को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, लोक नृत्यों और भजन-कीर्तन के आयोजनों के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध लोक कला को जीवित रखा जा रहा है।
मिल चुका है सिल्वर अवॉर्ड
इस पहल की सफलता और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018 में इसे “बेस्ट टूरिज्म विलेज अवॉर्ड” के तहत सिल्वर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान न केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए था, बल्कि ग्रामीण संस्कृति को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने के प्रयासों की सराहना भी थी।
इस पहल की सफलता और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018 में इसे “बेस्ट टूरिज्म विलेज अवॉर्ड” के तहत सिल्वर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान न केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए था, बल्कि ग्रामीण संस्कृति को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने के प्रयासों की सराहना भी थी।
सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण
मिस्टिक विलेज मात्र एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का काम कर रहा है। गद्दी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और स्थानीय विरासत को बचाए रखने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रहा है।
मिस्टिक विलेज मात्र एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का काम कर रहा है। गद्दी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और स्थानीय विरासत को बचाए रखने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रहा है।

















