धर्मशाला: प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली और उनके आचरण पर कड़ा प्रहार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी एडवोकेट विश्व चक्षु ने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी पुरानी आदतों से मजबूर हैं और उन्हें लगता है कि उनके द्वारा किया गया हर कार्य सही है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि आज सदन में जिस प्रकार मुख्यमंत्री ने असंसदीय शब्दों का प्रयोग कर विपक्ष को नीचा दिखाने का कुत्सित प्रयास किया, उसमें वह छह बार के विधायक व पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के धैर्य और लंबे संसदीय अनुभव के आगे पूरी तरह बौने साबित हुए। नेता प्रतिपक्ष की शालीनता और गरिमा का ही परिणाम था कि मुख्यमंत्री को न केवल अपने शब्दों के लिए माफी मांगने पर मजबूर होना पड़ा, बल्कि बजट की शुरुआत में कहे गए उन अमर्यादित शब्दों को सदन की कार्यवाही से भी हटाना पड़ा। विश्व चक्षु ने तंज कसते हुए कहा कि सुखविंदर सिंह सुक्खू कभी मंत्री तक नहीं रहे और सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के कारण उनमें न तो पद के अनुरूप शालीनता है और न ही वह अनुभव, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज पूरे प्रदेश और देश ने देखा। मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि संवैधानिक पद की एक मर्यादा होती है और उन्हें छात्र संगठन चलाने जैसी ओछी व छिछोरी हरकतों को त्याग कर गंभीर आचरण अपनाना चाहिए। भाजपा नेता ने कांग्रेस सरकार द्वारा पेश किए गए इस बजट को पूरी तरह अहंकार से भरा, जनविरोधी और दिशाहीन करार देते हुए कहा कि इस दस्तावेज ने मुख्यमंत्री की प्रशासनिक नालायकी और विफलता को प्रदेश की जनता के सामने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है, जिसमें आम जनमानस के हितों की अनदेखी कर केवल राजनीतिक प्रतिशोध और खोखली बयानबाजी को ही प्राथमिकता दी गई है।



















