Hamirpur: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किए गए वार्षिक बजट को लेकर हमीरपुर जिला में स्पष्ट रूप से दो अलग-अलग पक्ष नजर आ रहे हैं। बजट घोषणाओं के बाद जब जिले के विभिन्न वर्गों से संवाद किया गया, तो विकास की नई योजनाओं को लेकर उत्साह और बुनियादी जरूरतों को लेकर चिंता, दोनों ही स्वर प्रमुखता से सुनाई दिए। एक ओर जहां सत्ता पक्ष से जुड़े लोग और कुछ स्थानीय नागरिक इसे प्रदेश की तकदीर बदलने वाला बजट मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर युवा और व्यापारी वर्ग अपनी मांगों को लेकर अब भी असमंजस में हैं।
बजट के सकारात्मक पक्ष को रखते हुए हमीरपुर कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती शर्मा ने इसे आत्मनिर्भर हिमाचल की नींव बताया है। उन्होंने विशेष रूप से हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी मशीन की सुविधा, नए साइंस कॉलेज की स्थापना और कैंसर अस्पताल के लिए 1000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के प्रावधान को जिले के लिए बड़ी उपलब्धि करार दिया। इसके साथ ही, दूध, गेहूं और मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई वृद्धि को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने वाला कदम बताया गया है। स्थानीय निवासी अनिल मनकोटिया ने भी इसे ‘टूरिज्म फ्रेंडली’ बजट की संज्ञा देते हुए हेली टैक्सी जैसी योजनाओं की सराहना की, जिससे जिले में पर्यटन की नई संभावनाएं पैदा होने की उम्मीद है।
हालांकि, बजट की इस चमक के बीच युवाओं और व्यापारियों की नाराजगी भी साफ दिखाई दे रही है। दीक्षित गौतम जैसे युवाओं का कहना है कि उन्हें इस बजट से रोजगार के बड़े अवसरों की उम्मीद थी, जो पूरी होती नहीं दिख रही है। युवाओं का तर्क है कि स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में निवेश अपनी जगह सही है, लेकिन सरकारी नौकरियों और स्वरोजगार के लिए ठोस रोडमैप के बिना वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं, व्यापार मंडल से जुड़े लोगों का भी मानना है कि व्यापारिक गतिविधियों को गति देने के लिए बजट में और अधिक रियायतों की आवश्यकता थी। कुल मिलाकर, हमीरपुर की जनता के लिए यह बजट विकास के बड़े वादों और रोजगार की जमीनी हकीकत के बीच एक मिली-जुली प्रतिक्रिया लेकर आया है।




















