नई दिल्ली: भारत सरकार ने रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में इस्तेमाल होते हैं। सरकार का मकसद इन जरूरी सामग्रियों के लिए आयात पर निर्भरता कम करना और देश में ही मजबूत उत्पादन व्यवस्था बनाना है।
नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने 7,280 करोड़ की एक योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट तैयार किए जाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक देश के भीतर ही की जाएगी।
बजट 2026-27 में रेयर अर्थ कॉरिडोर का ऐलान
केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इन कॉरिडोर में खनन, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे इन राज्यों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।
क्यों जरूरी हैं रेयर अर्थ मैग्नेट
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बहुत ताकतवर और लंबे समय तक टिकने वाले होते हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के मोटर, पवन टरबाइन, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान, रक्षा उपकरण और एयरोस्पेस सिस्टम में होता है। जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इन मैग्नेट की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
भारत के पास संसाधन, लेकिन आयात ज्यादा
भारत के पास रेयर अर्थ मिनरल्स का बड़ा भंडार है। देश में लगभग 13.15 मिलियन टन मोनाजाइट मौजूद है, जिसमें से 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ ऑक्साइड निकल सकता है। ये खनिज ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड में पाए जाते हैं।
इसके बावजूद, अभी भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से मंगाता है। साल 2022 से 2025 के बीच भारत ने अपने परमानेंट मैग्नेट का 60 से 80 प्रतिशत (मूल्य के आधार पर) और 85 से 90 प्रतिशत (मात्रा के आधार पर) आयात चीन से किया।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
सरकार इस निर्भरता को कम करने के लिए कंपनियों को आर्थिक मदद दे रही है। योजना के तहत 6,450 करोड़ की बिक्री-आधारित प्रोत्साहन राशि और 750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। फैक्ट्रियां लगाने के लिए दो साल का समय मिलेगा।
IREL की अहम भूमिका
नए रेयर अर्थ कॉरिडोर, ओडिशा और केरल में IREL (India) Limited) की मौजूदा इकाइयों से जुड़े होंगे। IREL 1963 से रेयर अर्थ और अन्य जरूरी खनिजों के क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी ओडिशा में रेयर अर्थ निकालने का प्लांट और केरल के अलुवा में रिफाइनिंग यूनिट चलाती है।
स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा
सरकार का मानना है कि देश में ही रेयर अर्थ मैग्नेट बनने से न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन और पवन ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रक्षा और एयरोस्पेस जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित होगी। भारत ने रेयर अर्थ और अन्य जरूरी खनिजों की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए कई देशों के साथ समझौते किए हैं। इसके अलावा भारत Minerals Security Partnership और Indo-Pacific Economic Framework जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में भी हिस्सा ले रहा है।





















